कांग्रेस में बड़ा फेरबदल: दक्षिण हरियाणा की राजनीति में सक्रिय राव नरेंद्र सिंह बने प्रदेश अध्यक्ष , हुड्डा बने विधायक दल के नेता
कांग्रेस ने 18 साल बाद किसी गैर-दलित नेता को प्रदेश अध्यक्ष की कमान सौंपी है। साल 2007 में फूलचंद मुलाना के अध्यक्ष बनने के बाद से यह पद लगातार दलित समुदाय के नेताओं के पास रहा था

Gurugram News Network : हरियाणा कांग्रेस ने आगामी चुनावों के मद्देनजर बड़ा संगठनात्मक बदलाव करते हुए पूर्व मंत्री राव नरेंद्र सिंह को पार्टी का नया प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त किया है। उन्होंने निवर्तमान अध्यक्ष चौधरी उदयभान का स्थान लिया है। इसके साथ ही, पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा को एक बार फिर विधायक दल के नेता (सीएलपी लीडर) की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी गई है।
हाईकमान द्वारा जारी इस आदेश को हरियाणा कांग्रेस में ओबीसी समीकरण और क्षेत्रीय संतुलन साधने की बड़ी कवायद के तौर पर देखा जा रहा है।

कांग्रेस ने 18 साल बाद किसी गैर-दलित नेता को प्रदेश अध्यक्ष की कमान सौंपी है। साल 2007 में फूलचंद मुलाना के अध्यक्ष बनने के बाद से यह पद लगातार दलित समुदाय के नेताओं के पास रहा था, जिनमें अशोक तंवर, कुमारी सैलजा और फिर चौधरी उदयभान शामिल थे। राव नरेंद्र सिंह के रूप में अब यह जिम्मेदारी ओबीसी समुदाय के नेता को मिली है।


ओबीसी और अहीरवाल पर बड़ा दांव
राव नरेंद्र सिंह की नियुक्ति के पीछे कांग्रेस की स्पष्ट रणनीति नज़र आ रही है:

- ओबीसी वोट बैंक पर फोकस: अक्टूबर 2024 में होने वाले विधानसभा चुनावों को देखते हुए कांग्रेस ने ओबीसी समुदाय से आने वाले राव नरेंद्र सिंह को आगे किया है। भाजपा ने पिछले चुनावों में ओबीसी नेता नायब सैनी को चेहरा बनाकर बड़ा फायदा उठाया था, जिसके जवाब में कांग्रेस ने यह कदम उठाया है।
- अहीरवाल को 53 साल बाद नेतृत्व: राव नरेंद्र सिंह का संबंध अहीरवाल क्षेत्र (गुड़गांव, रेवाड़ी, महेंद्रगढ़) से है। इस क्षेत्र में कांग्रेस, राव इंद्रजीत सिंह के भाजपा में जाने के बाद से लगातार कमज़ोर हुई है। 12 में से केवल 1 सीट ही कांग्रेस जीत पाई थी। 53 साल बाद ऐसा मौका आया है जब अहीरवाल के किसी नेता को प्रदेश कांग्रेस की कमान मिली है। इससे पहले 1972 से 1977 तक राव निहाल सिंह प्रदेश अध्यक्ष रहे थे।
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, राव नरेंद्र सिंह के पक्ष में एक महत्वपूर्ण कारक यह भी रहा कि वह राज्य के भीतर किसी एक गुट से बंधे हुए नहीं माने जाते हैं। सूत्रों के मुताबिक, उनके नाम पर पार्टी के किसी भी धड़े ने कोई गंभीर आपत्ति नहीं जताई, जिससे हाईकमान के लिए सर्वसम्मति बनाना आसान हो गया।

कांग्रेस हाईकमान ने यह महत्वपूर्ण बदलाव ऐसे समय में किया है जब पार्टी बिहार में होने वाले विधानसभा चुनावों की रणनीति पर काम कर रही है। राव नरेंद्र सिंह और भूपेंद्र सिंह हुड्डा दोनों को 24 अगस्त को बिहार में हुई कांग्रेस वर्किंग कमेटी (CWC) की मीटिंग में बुलाया गया था, जहां इन नामों पर अंतिम मुहर लगी थी।
प्रमुख बदलाव:











